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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) की प्रमुख उपलब्धियां
DRDO ने 2024-25 में भारत की रक्षा क्षमताओं को मजबूत करने के लिए अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। 67वें स्थापना दिवस पर DRDO ने पिछले तीन वर्षों में 18,000 परीक्षण किए, जिनमें से केवल 2024 में 5,000 परीक्षण संपन्न हुए।
लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल
16 नवंबर 2024 को DRDO ने ओडिशा तट से भारत की पहली लंबी दूरी की हाइपरसोनिक मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह मिसाइल 1,500 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर सकती है और विभिन्न पेलोड ले जाने में सक्षम है। हाइपरसोनिक मिसाइलें मैक 5 (ध्वनि की गति से 5 गुना तेज) या उससे अधिक गति से उड़ती हैं और मध्य मार्ग में दिशा बदल सकती हैं, जिससे इनका पता लगाना और रोकना अत्यंत कठिन हो जाता है। इस उपलब्धि के साथ भारत अमेरिका, रूस और चीन के बाद चौथा देश बन गया है जिसके पास यह तकनीक है।
मिशन दिव्यास्त्र - अग्नि-5 MIRV
11 मार्च 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि DRDO ने मिशन दिव्यास्त्र के तहत अग्नि-5 मिसाइल के साथ MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक का सफल परीक्षण किया। अग्नि-5 की मारक क्षमता 5,000 किलोमीटर तक है, जो चीन के सबसे उत्तरी हिस्सों और यूरोप के कुछ क्षेत्रों तक पहुंच सकती है। MIRV तकनीक एक मिसाइल को कई स्वतंत्र री-एंट्री व्हीकल ले जाने और विभिन्न लक्ष्यों को सटीकता से नष्ट करने में सक्षम बनाती है।
अग्नि-प्राइम रेल-आधारित प्रक्षेपण
24 सितंबर 2025 को DRDO और रणनीतिक बल कमान ने रेल-आधारित मोबाइल लॉन्चर से मध्यम दूरी की अग्नि-प्राइम मिसाइल का सफल परीक्षण किया। यह 2,000 किलोमीटर की रेंज वाली अगली पीढ़ी की मिसाइल है। यह अपनी तरह का पहला प्रक्षेपण था, जो विशेष रूप से डिजाइन किए गए रेल-आधारित लॉन्चर से बिना किसी पूर्व-शर्त के रेल नेटवर्क पर चल सकता है। यह प्रणाली तेजी से तैनाती, कम प्रतिक्रिया समय और बेहतर उत्तरजीविता प्रदान करती है।
प्रलय मिसाइल परीक्षण
28-29 जुलाई 2025 को DRDO ने ओडिशा तट से प्रलय मिसाइल के दो लगातार सफल परीक्षण किए। ये परीक्षण उपयोगकर्ता मूल्यांकन परीक्षणों के तहत मिसाइल प्रणाली की अधिकतम और न्यूनतम दूरी की क्षमता को मान्य करने के लिए किए गए। मिसाइलों ने निर्धारित प्रक्षेपवक्र का सटीकता से पालन किया और लक्ष्य बिंदु पर पिन-पॉइंट सटीकता के साथ पहुंचीं।
MRSAM प्रणाली परीक्षण
अप्रैल 2025 में DRDO और भारतीय सेना ने ओडिशा के डॉ एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से मीडियम रेंज सरफेस टू एयर मिसाइल (MRSAM) प्रणाली के चार सफल परीक्षण किए। MRSAM लगभग 70 किलोमीटर की रेंज के साथ दुश्मन के विमानों, मिसाइलों और मानव रहित हवाई वाहनों के खिलाफ बहु-स्तरीय वायु रक्षा प्रदान करती है। यह प्रणाली उन्नत रडार, कमांड-एंड-कंट्रोल सिस्टम और मोबाइल लॉन्चरों से लैस है।
बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस सिस्टम फेज-II
DRDO ने फेज-II बैलिस्टिक मिसाइल डिफेंस (BMD) प्रणाली का सफल उड़ान परीक्षण किया। इस परीक्षण ने प्रणाली की नेटवर्क-केंद्रित युद्ध क्षमताओं को मान्य किया और लंबी दूरी के सेंसर, कम विलंबता संचार और उन्नत इंटरसेप्टर मिसाइलों की प्रभावशीलता की पुष्टि की। यह भारत की बैलिस्टिक मिसाइल खतरों के खिलाफ रक्षा क्षमता को मजबूत करता है।
आकाश मिसाइल प्रणाली
आकाश मिसाइल प्रणाली ने 25 किलोमीटर की रेंज पर एक साथ चार हवाई लक्ष्यों को निशाना बनाने की क्षमता का प्रदर्शन किया, जिससे भारत एक ही फायरिंग इकाई से यह उपलब्धि हासिल करने वाला पहला देश बन गया। नवंबर 2025 में भारत ने आर्मेनिया को स्वदेशी आकाश वेपन सिस्टम की पहली खेप भेजी, जो रक्षा संबंधों में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
फ्यूल सेल AIP तकनीक
2024 में DRDO ने पनडुब्बियों के लिए महत्वपूर्ण फ्यूल सेल एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (AIP) तकनीक को उत्पादन के लिए लार्सन एंड टुब्रो को हस्तांतरित किया। यह तकनीक भारत को स्वदेशी AIP प्रणालियों का उत्पादन करने वाले चुनिंदा देशों में शामिल करती है, जो नौसेना प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ा कदम है।
स्वदेशी पैराशूट सिस्टम
अक्टूबर 2025 में DRDO ने 32,000 फीट की ऊंचाई पर स्वदेशी पैराशूट सिस्टम का सफल परीक्षण किया। इस प्रणाली में स्वदेशी सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम (नाविक) की सुविधा शामिल है। यह प्रणाली बाहरी हस्तक्षेप या सेवा बाधा से प्रभावित नहीं होती और आयातित उपकरणों पर निर्भरता को कम करेगी।
हाई-स्पीड फ्लाइंग-विंग UAV
DRDO ने बिना ग्राउंड रडार या पायलट हस्तक्षेप के हाई-स्पीड फ्लाइंग-विंग UAV के सफल स्वायत्त लैंडिंग परीक्षण किए। यह क्षमता निगरानी और टोही मिशनों के लिए नए अवसर खोलती है।
लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलें
DRDO ने नवंबर 2024 में लंबी दूरी की भूमि हमला क्रूज मिसाइल (LRLACM) का पहला उड़ान परीक्षण किया, जिसकी रेंज 1,000 किलोमीटर से अधिक है। एक गुप्त परीक्षण में 402 किलोमीटर की रेंज वाली पनडुब्बी-प्रक्षेपित क्रूज मिसाइल (SLCM) का सफल परीक्षण किया गया।
प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और पेटेंट
2024 में DRDO को 201 से अधिक पेटेंट प्रदान किए गए और 226 से अधिक पेटेंट दायर किए गए। संगठन ने भारतीय उद्योगों को 1,950 प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (ToT) सौंपे हैं। 2024 में DRDO ने एयर डिफेंस टैक्टिकल कंट्रोल रडार (ADTCR), एयर डिफेंस फायर कंट्रोल रडार (ADFCR), लंबी दूरी की भूमि हमला क्रूज मिसाइल (LR-LACM), क्विक रिएक्शन सरफेस टू एयर मिसाइल (QRSAM), और मीडियम रेंज एंटी-शिप मिसाइल (MRAshM) जैसी कई उन्नत प्रणालियां सौंपीं।
रक्षा बजट और सुधार
केंद्रीय बजट 2024-25 में रक्षा मंत्रालय को 6.21 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो वित्त वर्ष 2023-24 से 4.79 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। पूंजीगत व्यय के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपये अलग रखे गए। DRDO ने 2025 को 'सुधारों का वर्ष' घोषित किया है और लैब्स को अगले स्थापना दिवस तक 100 महत्वपूर्ण परियोजनाओं को पूरा करने का लक्ष्य दिया गया है।



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