लोक सेवा आयोग (PCS ) सभी राज्यों द्वारा आयोजित एक प्रतियोगता परीक्षा है। इस प्रतियोगिता परीक्षाओं के आधार पर राज्य प्रशासन के लिए समय-समय पर राजपत्रित पदों पर अधिकारी चुने जाते हैं।  इस प्रतियोगिता परीक्षाओं में लाखों अभ्यर्थी अपना-अपना चयन सुनिश्चित करने के लिए तीन चरण (प्रारंभिक , मुख्य , साक्षात्कार ) में आयोजित होने वाले परीक्षा में शामिल होते हैं तथा प्रतिष्ठित पदों पर पहुंचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं।  

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा राजपत्रित पदों पर समय-समय पर प्रतियोगिता परीक्षाओं के माध्यम से राज्य प्रशासन के लिए सुयोग्य अधिकारी नियुक्त किए जाते हैं। यह प्रतियोगिता परीक्षा तीन चरणों प्रारंभिक , मुख्य , साक्षात्कार में आयोजित की जाती है। इस परीक्षा में लाखों अभ्यर्थी जो संबंधित राज्य एवं अन्य राज्यों से जुड़े होते हैं तथा इस परीक्षा में शामिल होते है। आयोग द्वारा दिए गए प्रतिष्ठित पदों तक पहुंचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं। जिनका सामान्य परिचय इस प्रकार है- 

1.बिहार प्रशासनिक सेवा (उप समाहर्ता)

2. बिहार राज्य सेवा (आरक्षी उपाधीक्षक)

3. जिला समादेष्टा (गृह रक्षा वाहिनी संगठन )

4.बिहार वित्त सेवा (वाणिज्य कर पदाधिकारी)

5. बिहार शिक्षा सेवा

6. बिहार श्रम सेवा (श्रम अधीक्षक एवं नियोजन पदाधिकारी)

7. बिहार कारा सेवा (कारा अधीक्षक एवं प्रोबेशन पदाधिकारी बिहार)

 8.सहकारिता सेवा वर्ग 2 अंतर्गत जिला आकेंक्षण  पदाधिकारी  एवं सहायक निबंधन 

9. गन्ना पदाधिकारी 

10.बिहार निबंधन सेवा (अवर निबंधक)

11. अवर निर्वाचन पदाधिकारी

12. उत्पादक निरीक्षक 

13.जनसंपर्क पदाधिकारी 

14.नगर कार्यपालक पदाधिकारी 

15.मध् निषेध 

नोट : - राज्य सरकार से सूचना प्राप्त होने पर अन्य कोई पर


प्रारंभिक परीक्षा:


  • बिहार लोक सेवा परीक्षा का प्रथम चरण प्रारंभिक परीक्षा कहलाता है। इसकी प्रकृति पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (बहुविकल्पीय) होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए पांच संभावित विकल्पों (a, b, c, d और e ) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है। 
  • प्रश्न से सम्बंधित आपके चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दी गई ओएमआर सीट में प्रश्न के सम्मुख दिये गए संबंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर काले /नीले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है। 
  • बिहार लोक सेवा परीक्षा 150  अंकों की होती है। 
  • वर्तमान में प्रारंभिक परीक्षा में एक  प्रश्नपत्र शामिल हैं। 
  • प्रश्नपत्रों में ‘निगेटिव मार्किंग की व्यवस्था लागू नहीं है।  जिसके तहत  सही उत्तर के बराबर अंक दिए जाते हैं।
मुख्य परीक्षा: 

  • बिहार लोक  सेवा परीक्षा का दूसरा चरण ‘मुख्य परीक्षा’ कहलाता है।
  • प्रारंभिक परीक्षा का उद्देश्य सिर्फ इतना है कि सभी उम्मीदवारों में से कुछ गंभीर व योग्य उम्मीदवारों को चुन लिया जाए तथा वास्तविक परीक्षा उन चुने हुए उम्मीदवारों के बीच आयोजित कराई जाए। 
  • मुख्य परीक्षा कुल 1000 अंकों की है जिसमें 600 अंक सामान्य अध्ययन के लिये ,100  अंक हिंदी , 300 अंक एक वैकल्पिक विषय के लिये निर्धारित हैं।
  • मुख्य परीक्षा में सामान्य हिंदी में 30 %  लब्धांक (अंक ) प्राप्त करना अनिवार्य होगा किन्तु इन प्रश्नपत्रों के अंक योग्यता निर्धारण में नहीं जोड़े जाते हैं।   
  • मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों भाषाओं में साथ-साथ प्रकाशित किये जाते हैं, हालाँकि उम्मीदवारों को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल 22 भाषाओं में से किसी में भी उत्तर देने की छूट होती है (केवल साहित्य के विषयों में यह छूट है कि उम्मीदवार उसी भाषा की लिपि में उत्तर लिखे है, चाहे उसका माध्यम वह भाषा न हो)।  
  • गौरतलब है कि जहाँ प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह वस्तुनिष्ठ (Objective) होती है, वहीं मुख्य परीक्षा में अलग-अलग शब्द सीमा वाले वर्णनात्मक (Descriptive) या व्यक्तिनिष्ठ (Subjective) प्रश्न पूछे जाते हैं। इन प्रश्नों में विभिन्न विकल्पों में से उत्तर चुनना नहीं होता बल्कि अपने शब्दों में लिखना होता है। यही कारण है कि मुख्य परीक्षा में सफल होने के लिये अच्छी लेखन शैली बहुत महत्त्वपूर्ण मानी जाती है।
साक्षात्कार
  • बिहार लोक सेवा परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण साक्षात्कार (Interview) कहलाता है।    
  • मुख्य परीक्षा मे चयनित अभ्यर्थियों को सामान्यत: आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है। 
  • इसमें न तो प्रारंभिक परीक्षा की तरह सही उत्तर के लिये विकल्प दिये जाते हैं और न ही मुख्य परीक्षा के कुछ प्रश्नपत्रों की तरह अपनी सुविधा से प्रश्नों के चयन की सुविधा होती है। हर प्रश्न का उत्तर देना अनिवार्य होता है और हर उत्तर पर आपसे प्रतिप्रश्न भी पूछे जा सकते हैं। यह परीक्षा आयोग के द्वारा आपकी प्रशासनिक क्षमता एवं निर्णय लेने की क्षमता पर आधारित होती है। सामान्य रूप से इसमें आयोग के द्वारा अभ्यर्थी से सम्बंधित जानकारी की अपेक्षा की जा सकती है। 
  • BPSC  द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा में इंटरव्यू के लिये कुल 120 अंक निर्धारित किये गए हैं। मुख्य परीक्षा के अंकों (900 +120 अंक) की अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इन अंकों का विशेष योगदान होता है। 
  • इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है, जिसमें आयोग में निर्धारित स्थान पर इंटरव्यू बोर्ड के सदस्यों द्वारा मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं, जिनका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से ही  देना होता है। 
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।   

सिविल सेवा परीक्षा का प्रारूप

परीक्षा की प्रकृति
बी.पी.एस.सी. द्वारा आयोजित इस प्रतियोगी परीक्षा में सामान्यत: क्रमवार तीन स्तर सम्मिलित हैं-
प्रारंभिक परीक्षा - वस्तुनिष्ठ प्रकृति 
मुख्य परीक्षा - वर्णनात्मक एवं वस्तुनिष्ठ प्रकृति 
साक्षात्कार - मौखिक

लोक सेवा आयोग (BPSC) द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा का प्रारूप इस प्रकार है – 

परीक्षा

विषय

कुल अंक

परीक्षा की अवधि

प्रारंभिक

सामान्य अध्ययन  प्रश्नपत्र

150

2 घंटे की होगी

                                              

 

मुख्य

कोड     -  01      सामान्य हिंदी

100

3 घंटे की होगी

कोड - 02     सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –I)

300

3 घंटे की होगी

कोड - 03    सामान्य अध्ययन  (प्रश्नपत्र –II)

300

3 घंटे की होगी

कोड - 38 निबंध 

300


3 घंटे की होगी

 वैकल्पिक पेपर (MCQ)     कोड - 04 - 37

 

100

 2 घंटे की होगी

साक्षात्कार

व्यक्तित्व परीक्षण

120

 

 नोट:

  • 68वीं BPSC की प्रारंभिक परीक्षा से गलत उत्तर के लिये निगेटिव मार्किंग (एक चौथाई - 1/4 या 0.25 अंक) का प्रावधान किया गया है।
  •  प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त किये गये अंकों को मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।
  • उम्मीदवारों को सामान्य हिंदी में कम से कम 30 अंको को प्राप्त करना होगा।
  •   सामान्य अध्ययन के प्रश्न हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओँ में होंगे।
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार के अंकों (900+120=1020) 
  •  उम्मीदवार का अंतिम चयन मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गये अंकों के योग के आधार पर होता है। 
परीक्षा की प्रक्रिया     
प्रारम्भिक परीक्षा की प्रक्रिया:

  • प्रारंभिक परीक्षा एक ही दिन आयोग द्वारा निर्धारित राज्य के विभिन्न केंद्रों पर संपन्न होती है।
  • आयोग द्वारा आयोजित प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति वस्तुनिष्ठ होती है, जिसके अंतर्गत प्रत्येक प्रश्न के लिये दिये गए पाँच संभावित विकल्पों (a, b, c, d और e) में से एक सही विकल्प का चयन करना होता है।
  • प्रश्न से संबंधित इस चयनित विकल्प को आयोग द्वारा दिये गए ओएमआर सीट में उसके सम्मुख दिये गए संबंधित गोले (सर्किल) में उचित स्थान पर काले या नीले बॉल पॉइंट पेन से भरना होता है।
  • वर्तमान में आयोग की इस प्रारंभिक परीक्षा में अन्य राज्यों से भिन्न केवल एक प्रश्न-पत्र सामान्य अध्ययन (वस्तुनिष्ठ) से प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसमें प्रश्नों की कुल संख्या- 150 एवं अधिकतम अंक-150 निर्धारित है। इसका उत्तर अभ्यर्थियों को आयोग द्वारा निर्धारित दो घंटे की समय सीमा में देना होता है।
  • प्रश्नपत्र दो भाषाओं (हिन्दी एवं अंग्रेजी) में दिये गए होते है। प्रश्न की भाषा संबंधी किसी भी विवाद की स्थिति में अंग्रेजी भाषा में छपे प्रश्नों को वरीयता दी जाएगी।
  • प्रारंभिक परीक्षा की प्रकृति क्वालिफाइंग होती है। इसमें प्राप्त अंकों को मुख्य परीक्षा या साक्षात्कार के अंकों के साथ नहीं जोड़ा जाता है।
  • इस परीक्षा के आधार पर मुख्य परीक्षा के लिये चुने जाने वाले अभ्यर्थियों की संख्या कुल संसूचित रिक्तियों की दस गुना होगी (पूर्व में यह संख्या प्रारंभिक परीक्षा में उपस्थित कुल अभ्यर्थियों की संख्या का लगभग 10% होती थी)।
  • 68वीं BPSC की प्रारंभिक परीक्षा से गलत उत्तर के लिये निगेटिव मार्किंग (एक चौथाई - 1/4 या 0.25 अंक) का प्रावधान किया गया है।
मुख्य परीक्षा की प्रक्रिया: 

  • प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए अभ्यर्थियों के लिये मुख्य परीक्षा का आयोजन पटना में आयोग द्वारा निर्धारित विभिन्न केंद्रों पर किया जाता है।
  • मुख्य परीक्षा की प्रकृति वर्णनात्मक एवं वस्तुनिष्ठ होती है। इसमें प्रश्नों के उत्तर को आयोग द्वारा दी गई उत्तर-पुस्तिका में लिखना एवं वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्नों के उत्तर को OMR सीट में भरना होता है।
  • मुख्य परीक्षा के प्रश्नपत्र दो भागों (अनिवार्य एवं वैकल्पिक) में विभाजित हैं।
  • अनिवार्य विषयों में- सामान्य अध्ययन के प्रथम एवं द्वितीय प्रश्नपत्र तथा निबंध के प्रश्नपत्र शामिल हैं।
  • सामान्य हिन्दी के प्रश्नपत्र को क्वालिफाइंग प्रकृति का कर दिया गया है।
  • वैकल्पिक विषय में- अभ्यर्थी द्वारा विज्ञप्ति के दौरान उसमें दिये गए विषयों में से चयनित एक वैकल्पिक विषय शामिल है (पूर्व में दो वैकल्पिक विषयों का चयन करना होता था)। वर्तमान में वैकल्पिक विषय के प्रश्नपत्र को क्वालिफाइंग प्रकृति का कर दिया गया है।
  • मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषयों का स्टैंडर्ड लगभग वही होगा जो पटना विश्वविद्यालय के तीन वर्षीय ऑनर्स परीक्षा का है।
  • मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषयों का एक बार किया गया चुनाव अंतिम होगा जो किसी भी दशा में बदला नहीं जाएगा।

निबंध

  • बी.पी.एस.सी. द्वारा 68वीं मुख्य परीक्षा से निबंध के प्रश्नत्र को पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है।
  • यह प्रश्नपत्र 300 अंको का होगा, इन अंको को मेधा सूची के निर्धारण में शामिल किया जाएगा।
  • इस प्रश्नपत्र के अंतर्गत 3 खंडो में (प्रत्येक में चार-चार निबंध के प्रश्न रहेगें) से प्रत्येक खंड से एक-एक निबंध अर्थात् कुल तीन निबंध लिखने होगें।
  • पहले और दूसरे खंड का निबंध यूपीएससी पैटर्न पर आधारित होगा जबकि तीसरे खंड का निबंध बिहार ओरिएंटेड विषय पर आधारित होगा।

साक्षात्कार की प्रक्रिया: 

  • साक्षात्कार के दौरान अभ्यर्थियों के व्यक्तित्व का परीक्षण किया जाता है जिसमें आयोग के सदस्यों द्वारा आयोग में निर्धारित स्थान पर मौखिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसका उत्तर अभ्यर्थी को मौखिक रूप से देना होता है। यह प्रक्रिया अभ्यर्थियों की संख्या के अनुसार एक से अधिक दिनों तक चलती है।
  • मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त किये गए अंकों के योग के आधार पर अंतिम रूप से मेधा सूची (मेरिट लिस्ट) तैयार की जाती है।
  • आरक्षी सेवा तथा उत्पाद निरीक्षक के लिये एनसीसी प्रशिक्षण प्रमाण-पत्र प्राप्त अभ्यर्थियों को साक्षात्कार में लाभ (वेटेज) दिया जाता है।
  • सम्पूर्ण साक्षात्कार समाप्त होने के  पश्चात् अन्तिम रूप से चयनित अभ्यर्थियों की सूची जारी की जाती है।
                                                          प्रारंभिक परीक्षा रणनीति
  • सामान्य अध्ययन रणनीति
  • परीक्षा भवन में रणनीति
सामान्य अध्ययन रणनीति

  • प्रारंभिक परीक्षा के प्रथम प्रश्नपत्र में दो तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं, एक तो सामान्य अध्ययन के परंपरागत खंडों से और दूसरे, समसामयिक घटनाक्रमों से| परंपरागत खंडों से पूछे जाने वाले प्रश्न मुख्यतः भारत के इतिहास और स्वाधीनता आंदोलन में  बिहार से संबंधित योगदान , भारतीय संविधान व राजव्यवस्था तथा बिहार के राजव्यस्था ,  भारत , विश्व और बिहार  का भूगोल , भारतीय अर्थव्यवस्था, आर्थिक और सामाजिक विकास ,बिहार बजट , सामान्य विज्ञान  से संबंधित होते हैं। साथ ही, इस प्रश्नपत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के समसामयिक घटनाक्रमों से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाते हैं।
  • इस प्रश्नपत्र की सटीक रणनीति बनाने के लिये विगत वर्षों में प्रारंभिक परीक्षा के  विभिन्न खंडों से पूछे गए प्रश्नों का सूक्ष्म अवलोकन आवश्यक है, जिनका विस्तृत विवरण इस तालिका के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है। 

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विषय

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 प्रतिवर्ष औसतन पूछे जाने वाले प्रश्नों की संख्या

 भारत का इतिहास और स्वाधीनता आंदोलन

 

 

 भारतीय संविधान  राजव्यवस्था

 

 

 

 

 भारत , विश्व और बिहार  का भूगोल

 

 

 

 

 

 

 भारत की अर्थव्यवस्थाआर्थिक और सामाजिक विकास

 

 

 

 

 

 

 सामान्य विज्ञान

 

 

 

 

 

राष्ट्रीय   और अंतर्राष्ट्रीय   महत्त्व की समसामयिक घटनाएँ/विविध   

 

 

 

 

 

 

 कुल

 150

 150

 150

 150

 150

 150

 150

 कुल

 

 

 

 

 

 

 

 परीक्षा भवन में रणनीति

  •  परीक्षा के कुछ घंटो  में सर्वश्रेष्ठ समय-प्रबंधन, विशिष्ट मानसिक एकाग्रता तथा उच्च दिमागी सक्रियता। 
  •  प्रश्नों की प्रकृति को समझते हुए उन्हें समयानुसार ज़ल्दी हल करने की युक्ति अपनाना भी महत्त्वपूर्ण है। 
  •  छात्र परीक्षा भवन में अपेक्षित आत्मविश्वास बनाये रखे तथा नकारात्मक विचार से बचे  । 
  •  आप जीतेंगे तभी जब अंतिम 2 घंटों में आप औरों से बेहतर व विशिष्ट प्रदर्शन करेंगे। अतः इस मुद्दे पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। 


 Mains Exam Strategy (मुख्य परीक्षा रणनीति)

  • सामान्य हिंदी का प्रश्नपत्र केवल क्वालिफाइंग ( 30 अंक प्राप्त करना अनिवार्य) होता है लेकिन  महत्त्वपूर्ण भूमिका होती है, क्योंकि इसमें असफल होने वाले अभ्यर्थियों की शेष प्रश्नपत्र की उत्तर-पुस्तिका का मूल्यांकन  नहीं किया जाता है। 
  • सामान्य हिंदी में क्वालिफाइंग अंक प्राप्त करने के लिये हिंदी के व्याकरण (उपसर्ग, प्रत्यय, विलोम इत्यादि) की समझ, संक्षिप्त सार, अपठित गद्यांश इत्यादि की अच्छी जानकारी आवश्यक माना गया  है। इसके लिये हिंदी की पुस्तकें जैसे – वासुदेवनंदन  द्वारा लिखित पुस्तकों का अध्ययन करना लाभदायक सिध्द हो सकता है। 
  • सामान्य अध्ययन के प्रथम प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम में भारत का आधुनिक इतिहास और भारतीय संस्कृति, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व का वर्तमान घटनाक्रम, सांख्यिकी विश्लेषण, आरेखन और चित्रण आदि  शामिल हैं। 
  • भारत का आधुनिक इतिहास और भारतीय संस्कृति तथा राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के वर्तमान घटनाक्रम का अध्ययन बिहार राज्य विशेष के सन्दर्भ में करना प्रासंगिक है। क्योंकि इनमें से  ज़्यादातर प्रश्न बिहार से सम्बंधित  होते हैं जैसे- 1857 के विद्रोह में बिहार की भूमिका ,चम्पारण सत्याग्रह, संथाल विद्रोह, मुंडा विद्रोह, भारत छोड़ो आन्दोलन आदि में बिहार की भूमिका से सम्बंधित प्रश्न पूछे जाते रहे हैं । 
  • राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्त्व के वर्तमान घटनाक्रम के अध्ययन के लिये इस खंड से सम्बंधित प्रारंभिक परीक्षा के लिये अपनाई गई रणनीति का विस्तृत अध्ययन लाभदायक रहेगा। 
  • सांख्यिकीय विश्लेषण, आरेखन और चित्रण में विगत वषों में पूछे गए प्रश्नों का प्रतिदिन अभ्यास करना लाभदायक  सिद्ध रहेगा ।  इसके लिये NCERT  की पुस्तक की सहायता लिया जा  सकता  है।
  • सामान्य अध्ययन के द्वितीय प्रश्नपत्र के पाठ्यक्रम में भारतीय राजव्यवस्था, भारतीय अर्थव्यवस्था और भारत का भूगोल, भारत के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका और प्रभाव शामिल है। 
  • इस प्रश्नपत्र के भी सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का अध्ययन बिहार राज्य विशेष के सन्दर्भ में करना प्रासंगिक है,क्योंकि प्रश्न बिहार से सम्बंधित होते हैं। साथ ही तकनीक की उपयोगिता से सम्बंधित अनुप्रयोगात्मक प्रश्न भी पूछे जाते हैं। जैसे- भारत के सन्दर्भ में सुदूर संवेदी उपग्रह की उपयोगिता का आलोचनात्मक परीक्षण कीजिये। 
  • नवीन संशोधन के अनुसार, अब वैकल्पिक विषयों का पाठ्यक्रम पूर्व के प्रथम प्रश्नपत्र एवं द्वितीय प्रश्नपत्र को मिलाकर होगा। ऐसे में जहाँ समय प्रबंधन एक चुनौती बन कर उभरा है, वहीं इस मुख्य परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त करने के लिये सम्पूर्ण पाठ्यक्रम की विस्तृत समझ आवश्यक है।   
  • मुख्य परीक्षा के वैकल्पिक विषयों की तैयारी के लिये सम्बंधित विषय के  पुस्तक  /नोट्स का अध्ययन करके बिन्दुवार नोट्स एवं प्रश्नों की सिनोप्सिस तैयार करना लाभदायक रहता है। इससे आप मुख्य परीक्षा के दौरान सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का त्वरित अध्ययन कर सकते हैं। 
  • विदित है कि वर्णनात्मक प्रकृति वाले प्रश्नपत्रों के उत्तर को उत्तर-पुस्तिका में लिखना होता है, अत: ऐसे प्रश्नों के उत्तर लिखते समय लेखन शैली एवं तारतम्यता के साथ-साथ समय प्रबंधन पर विशेष ध्यान देना चाहिये। 
  • लेखन शैली एवं तारतम्यता का विकास निरंतर अभ्यास से आता है जिसके लिये विषय की व्यापक समझ अनिवार्य है।

निम्ननलिखित विषयों में से किसी एक विषय को मुख्य परीक्षा के लिए चयन करना होगा। 

मुख्य परीक्षा हेतु  ऐच्छिक विषय एवं कोड निम्नवत है -

क्रम संख्या 

विषय कोड

विषय 

1

04

 कृषि विज्ञान   

2

05

पशुपालन एवं पशु चिकित्सा विज्ञान

3

06

मानव  विज्ञान

4

07

वनस्पति विज्ञान

5

08

रसायन    विज्ञान

6

09

सिविल इंजीनियरिंग 

7

10

वाणिज्य तथा लेखा विधि    

8

11

अर्थशास्त्र  

9

12

विद्युत इंजीनियरिंग

10

13

भूगोल  

11

14

भू -विज्ञान   

12

15

इतिहास  

13

16

श्रम एवं समाज कल्याण

14

17

विधि 

15

18

प्रबंध 

16

19

गणित  

17

20

यांत्रिक इंजीनियरिंग

18

21

दर्शनशास्त्र  

19

22

भौतकी    

20

23

राजनीतिक विज्ञान तथा अंतरराष्ट्रीय संबंध

21

24

मनोविज्ञान             

22

25

लोक प्रशासन                   

23

26

समाजशास्त्र  

24

27

सांख्यिकी  

25

28

प्राणी विज्ञान    

26

29

हिंदी भाषा और साहित्य

27

30

अंग्रेजी भाषा और साहित्य

28

31

उर्दू भाषा और साहित्य

29

32

बांग्ला भाषा और साहित्य

30

33

संस्कृत भाषा और साहित्य

31

34

फारसी भाषा और साहित्य

32

35

अरबी भाषा और साहित्य

33

36

 पाली भाषा और साहित्य

34

37

मैथिली भाषा और साहित्य 

 

 Interview Strategy(साक्षात्कार की रणनीति)

साक्षात्कार की रणनीति :

  • मुख्य परीक्षा में चयनित अभ्यर्थियों (सामान्यत: विज्ञप्ति में वर्णित कुल रिक्तियों की संख्या का 3 गुना) को आयोग के समक्ष साक्षात्कार के लिये उपस्थित होना होता है।
  • साक्षात्कार परीक्षा का अंतिम एवं महत्त्वपूर्ण चरण होता है।    
  • अंकों की दृष्टि से कम लेकिन अंतिम चयन एवं पद निर्धारण में इसका विशेष योगदान होता है। 
  • वर्तमान संशोधन के अनुसार BPSC  में साक्षात्कार के लिये 120 अंक निर्धारित हैं (पूर्व में 150 अंक निर्धारित था)।
  •  मुख्य परीक्षा एवं साक्षात्कार में प्राप्त कुल अंकों के आधार पर  मेरिट लिस्ट के तैयार  होता है।