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वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) की प्रमुख उपलब्धियां
वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (CSIR) ने 2024-25 में विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं, जो भारत को वैज्ञानिक नवाचार और सतत विकास में अग्रणी बनाती हैं। CSIR ने 24 जून 2024 को **One Week, One Theme (OWOT)** कार्यक्रम की शुरुआत की।
भारत की पहली लिथियम बैटरी रीसाइक्लिंग सुविधा
CSIR-राष्ट्रीय धातुकर्म प्रयोगशाला (NML) जमशेदपुर ने सितंबर 2023 में CSIR की **पहली लिथियम बैटरी रीसाइक्लिंग पायलट सुविधा** का उद्घाटन किया। यह सुविधा **1 टन प्रति दिन (1TPD)** बैटरी डिसमेंटलिंग और कैथोड मैटेरियल सेपरेशन सेटअप से लैस है। यह लिथियम, निकल, मैंगनीज और कोबाल्ट जैसी महत्वपूर्ण धातुओं की मांग को पूरा करने और भारत के आत्मनिर्भर ईवी मिशन का समर्थन करने के लिए स्थापित की गई है। यह सुविधा लिथियम-आयन बैटरी (LFP सहित) और निकल-आधारित बैटरी जैसी किसी भी प्रकार की खर्च हुई रिचार्जेबल बैटरी को संसाधित कर सकती है।
REJUPAVE प्रौद्योगिकी - उच्च ऊंचाई सड़क निर्माण
CSIR-केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान (CRRI) द्वारा विकसित **REJUPAVE तकनीक** का सफल उपयोग बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (BRO) द्वारा अरुणाचल प्रदेश और लद्दाख में किया गया। यह तकनीक कम और शून्य से कम तापमान में उच्च ऊंचाई वाली बिटुमिनस सड़कों के निर्माण की सुविधा प्रदान करती है। BRO के प्रोजेक्ट विजयक ने कारगिल के **द्रास-उंबाला-संकू रोड** पर इस तकनीक का उपयोग किया, जो विश्व के दूसरे सबसे ठंडे बसे हुए स्थान द्रास में स्थित है। REJUPAVE बिटुमिनस मिश्रण के उत्पादन और रोलिंग तापमान को **30-40 डिग्री सेल्सियस तक कम** करता है और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को भी घटाता है। इस तकनीक का उपयोग विश्व की सबसे ऊंची **सेला रोड टनल** और **14,000 से 18,000 फीट की ऊंचाई** पर सड़क निर्माण में किया गया।
स्वदेशी कामिकाज़े ड्रोन
CSIR-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (NAL) ने स्वदेशी इंजन द्वारा संचालित **कामिकाज़े ड्रोन** विकसित किए हैं, जो **1,000 किलोमीटर** की रेंज प्रदान करते हैं। ये ड्रोन लगभग **2.8 मीटर लंबे और 3.5 मीटर के पंख फैलाव** के साथ हैं। इन ड्रोनों की विशेष क्षमता यह है कि वे GPS-denied वातावरण में भी काम कर सकते हैं, क्योंकि वे ISRO द्वारा विकसित नेविगेशन प्रणाली **NavIC** से लैस हैं। ये ड्रोन **30 किलोग्राम विस्फोटक ले जाने में सक्षम** हैं और झुंड में तैनात किए जा सकते हैं। CSIR ने लॉइटरिंग म्युनिशन या कामिकाज़े ड्रोन पर परियोजना शुरू करने के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दी है, जिसमें CSIR-NAL नोडल प्रयोगशाला है।
CL-20 उच्च-ऊर्जा प्रणोदक विनिर्माण
CSIR-भारतीय रासायनिक प्रौद्योगिकी संस्थान (IICT) ने **CL-20** नामक उच्च-ऊर्जा प्रणोदक के विनिर्माण के लिए एक नई प्रक्रिया विकसित की है। यह तकनीक रॉकेट ईंधन उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इलेक्ट्रिक टिलर - किसानों के लिए
CSIR-केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CMERI) ने छोटे किसानों के लिए डिजाइन किया गया **इलेक्ट्रिक टिलर** पेश किया। यह शून्य उत्सर्जन और बेहतर दक्षता के साथ सतत कृषि पद्धतियों को बढ़ावा देता है।
सोलर ट्री तकनीक
CSIR के दुर्गापुर स्थित केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (CMERI) ने **सोलर ट्री** विकसित किया है। यह नवीन प्रौद्योगिकी सीमित स्थान में सौर ऊर्जा उत्पादन को अधिकतम करती है।
दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर
CSIR ने **दृष्टि ट्रांसमिसोमीटर** विकसित किया, जो एक स्वदेशी, नवोन्मेषी और लागत प्रभावी दृश्यता मापन प्रणाली है। यह विमान चालकों को सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ संचालन के लिए दृश्यता संबंधी जानकारी प्रदान करती है और सभी एयरपोर्ट श्रेणियों के लिए उपयुक्त है।
हेड-अप-डिस्प्ले (HUD) - तेजस के लिए
CSIR-राष्ट्रीय एयरोस्पेस प्रयोगशाला (NAL) ने भारतीय लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट **तेजस** के लिए स्वदेशी **हेड-अप-डिस्प्ले (HUD)** विकसित किया। यह पायलटों को महत्वपूर्ण उड़ान जानकारी प्रदान करने में मदद करता है।
पेटेंट और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण
2024-25 में CSIR ने लगभग **296 भारतीय पेटेंट और 260 विदेशी पेटेंट** दायर किए। CSIR के पास **1,392 अद्वितीय पेटेंट का पोर्टफोलियो** है। CSIR-केंद्रीय भवन अनुसंधान संस्थान (CBRI) ने 2024 में **कोयला स्तंभ सुदृढ़ीकरण, रोबोटिक उपकरण, और 3D डिफॉर्मोमीटर** सहित कई पेटेंट प्राप्त किए।
जैव-ऊर्जा संयंत्र
CSIR-राष्ट्रीय पर्यावरण इंजीनियरिंग अनुसंधान संस्थान (NIIST) ने **त्रिवेंद्रम अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे** पर ठोस-अवस्था खाद्य अपशिष्ट जैव-ऊर्जा संयंत्र स्थापित किया। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में **फार्म अपशिष्ट-आधारित जैव-ऊर्जा संयंत्र** भी स्थापित किया गया।
जल उपचार प्रणाली
CSIR-NIIST ने **ग्रे वाटर उपचार और पुन: उपयोग के लिए बायो-इको इंजीनियरिंग प्रणाली** विकसित की है। संस्थान ने एंडोक्राइन-विघटनकारी उभरते प्रदूषकों के लिए **सामुदायिक स्तर की भूजल उपचार प्रणाली** भी स्थापित की है।
कृषि-अवशेष से जैव-विघटनीय कटलरी
CSIR-NIIST ने कृषि अवशेषों से **जैव-विघटनीय कटलरी और वेगन लेदर** विकसित किया है। यह पर्यावरण के अनुकूल विकल्प पारंपरिक प्लास्टिक उत्पादों के स्थान पर उपयोग किया जा सकता है।
AI सक्षम प्रौद्योगिकियां
CSIR ने **AI Enabled Technologies and Systems (AITS)** पर 2022-2025 के लिए एक विशेष परियोजना शुरू की है। इसमें डीप लर्निंग तकनीकों का उपयोग करके **स्वचालित वाहन गणना और वर्गीकरण सॉफ्टवेयर (AVCC)** का विकास शामिल है।
कार्बन कैप्चर और भंडारण
CSIR ने कार्बन कैप्चर, स्टोरेज और उपयोग (CCUS) पर कई परियोजनाएं शुरू की हैं। CSIR-CSMCRI ने अदानी समूह के साथ एल्गी-आधारित फ्लू गैस CO2 अनुक्रमण पर सहयोग किया है।
प्लास्टिक डीपॉलिमराइजेशन
CSIR ने 2022-2025 के लिए प्लास्टिक डीपॉलिमराइजेशन और अपसाइक्लिंग पर एक महत्वपूर्ण परियोजना शुरू की है। यह पर्यावरण संरक्षण और सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने में सहायक है।
CSIR पुरस्कार और मान्यता
2024-2025 के लिए डॉ. मनोज के. पटेल, प्रधान वैज्ञानिक को प्रतिष्ठित CSIR रमन अनुसंधान फैलोशिप से सम्मानित किया गया। यह फैलोशिप उत्कृष्ट वैज्ञानिक योगदान को मान्यता देती है।
वित्तीय पारदर्शिता
CSIR ने 31 मार्च 2025 को वित्तीय वर्ष 2024-25 के वार्षिक खाते नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) को जमा किए। इस उपलब्धि में Accounts Management System (AMS) सॉफ्टवेयर की सफल प्रणाली महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जो पूर्णतः स्वदेशी रूप से विकसित की गई है।
वर्ष-समाप्ति समीक्षा 2024
26 दिसंबर 2024 को जारी CSIR की वर्ष-समाप्ति समीक्षा में बुनियादी ढांचे, रक्षा, सतत प्रौद्योगिकियों और स्वास्थ्य सेवा जैसे क्षेत्रों में व्यापक योगदान को रेखांकित किया गया। ये उपलब्धियां भारत को वैज्ञानिक नवाचार और सतत विकास में एक नेता के रूप में स्थापित करती हैं.



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