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पंचवर्षीय योजनाओं के दौरान विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में प्रगति
भारत की पंचवर्षीय योजनाओं ने देश के विज्ञान और प्रौद्योगिकी क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 1951 से शुरू हुई इन योजनाओं ने कृषि, उद्योग, विज्ञान, तकनीकी, शिक्षा और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में विकास के लक्ष्यों को निर्धारित किया।
प्रथम पंचवर्षीय योजना (1951-1956)
- वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राथमिकता: योजना आयोग की स्थापना 1950 में हुई, जिसका उद्देश्य वैज्ञानिक अनुसंधान को प्राथमिकता देना था। इस योजना ने राष्ट्रीय स्तर पर ग्यारह अनुसंधान संस्थानों को मान्यता दी और देश के भविष्य के विकास में उनके महत्व पर बल दिया।
- प्रमुख संस्थान: इनमें राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (नई दिल्ली), राष्ट्रीय रासायनिक प्रयोगशाला (पुणे, महाराष्ट्र), और केंद्रीय विद्युत रासायनिक अनुसंधान संस्थान (कराईकुडी, तमिलनाडु) शामिल थे। योजना ने इन प्रयोगशालाओं को पूर्ण रूप से कार्यात्मक बनाने के लिए भवन निर्माण और आवश्यक उपकरणों की स्थापना का प्रावधान किया।
- तकनीकी शिक्षा : इस अवधि में खड़गपुर में प्रथम आईआईटी की स्थापना की गई, जो भारत में तकनीकी शिक्षा के विकास में एक मील का पत्थर थी।
द्वितीय पंचवर्षीय योजना (1956-1961)
- औद्योगिक एवं तकनीकी विकास : इस योजना का मुख्य फोकस उद्योग, विशेषकर भारी उद्योग के विकास पर था। योजना ने औद्योगिक उत्पादों के घरेलू उत्पादन पर जोर दिया और पांच अलग-अलग क्षेत्रों में प्रौद्योगिकी संस्थान स्थापित किए।
- परमाणु ऊर्जा का विकास: परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना 1958 में होमी भाभा की अध्यक्षता में हुई। टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च को अनुसंधान संस्थान के रूप में मान्यता मिली।
- प्रतिभा विकास: परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में युवा प्रतिभा को बढ़ावा देने के लिए 1957 में टैलेंट सर्च व स्कॉलरशिप कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
तीसरी पंचवर्षीय योजना (1961-1966)
- कृषि अनुसंधान : इस योजना में गेहूं और अन्य फसलों के विकास पर बल दिया गया, जिसने आगे चलकर हरित क्रांति की नींव रखी।
- वैज्ञानिक और तकनीकी अवसंरचना : इस अवधि में वैज्ञानिक अनुसंधान और तकनीकी विकास के लिए बुनियादी ढांचे का विस्तार किया गया।
- हरित क्रांति की स्थापना: कृषि क्षेत्र में विकास के लिए अनुसंधान तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर विशेष बल देते हुए इस योजना की शुरुआत की गई। हरित क्रांति ने कृषि को बढ़ावा दिया और देश को खाद्यान्नों में आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा गया।
- परमाणु परीक्षण : 1974 में भूमिगत परमाणु परीक्षण जिसे 'स्माइलिंग बुद्धा' के नाम से जाना जाता है, इसी योजना के दौरान सफलतापूर्वक किया गया।
- नवीन तकनीक का प्रयोग : इस बात पर विशेष बल दिया गया कि देश नवीन तकनीकी के प्रयोग से कृषि क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो।
- आर्थिक और पर्यावरणीय एकीकरण : इस योजना में पहली बार आर्थिक विकास की योजना में पारिस्थितिकीय कारकों को शामिल किया गया।
- प्रौद्योगिकी विकास : समन्वित पारिस्थितिकीय विकास हेतु प्रौद्योगिकी विकास एवं अनुसंधान तथा प्रौद्योगिकी प्रदर्शन एवं प्रसार पर ध्यान केंद्रित किया गया।
- तकनीकी क्षेत्रों का विकास : इस योजना का प्रमुख उद्देश्य देश में तकनीकी क्षेत्रों में विकास करना था। यह योजना राजीव गांधी के नेतृत्व में लॉन्च हुई और तकनीकी आधुनिकीकरण पर जोर दिया गया।
- मानव संसाधन विकास: इस योजना में सबसे ज्यादा प्राथमिकता मानव संसाधन के विकास, रोजगार और शिक्षा पर दी गई।
- प्रौद्योगिकी विकास कार्यक्रम: इस योजना से प्रौद्योगिकी विकास और प्रदर्शन कार्यक्रम (A2K+) परियोजनाओं को समर्थन दिया गया, जो आगे भी जारी रहा।[10]
- वैज्ञानिक उत्कृष्टता : योजना में कुछ चुनिंदा सीमांत क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करने के लिए विश्व स्तरीय अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना की स्थापना पर जोर दिया गया।बारहवीं पंचवर्षीय योजना (2012-2017)
- विज्ञान अनुसंधान और नवाचार : इस योजना में विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार प्रणाली के योगदान को समावेशी आर्थिक विकास एजेंडा के साथ जोड़ने पर बल दिया गया।
- वैश्विक वैज्ञानिक शक्ति : 2020 तक भारत को शीर्ष पांच वैश्विक वैज्ञानिक शक्तियों में स्थान दिलाने का लक्ष्य रखा गया।
- राष्ट्रीय सुविधाओं का निर्माण : अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में राष्ट्रीय सुविधाओं का निर्माण और विकास किया गया। विज्ञान और प्रौद्योगिकी की साझेदारी विकास पर जोर दिया गया।
- मेगा साइंस प्रोजेक्ट: भारत और विदेशों में अनुसंधान और विकास अवसंरचना के निर्माण के उद्देश्य से मेगा साइंस परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश किया गया।
- अंतरिक्ष क्षेत्र: भारत ने मंगलयान (मार्स मिशन), चंद्रयान मिशन में उल्लेखनीय सफलता प्राप्त की। क्रायोजेनिक तकनीक में 2003 में सफलता मिली और भारत अपने स्वयं के क्रायोजेनिक इंजन विकसित करने वाले केवल छह देशों में से एक बन गया।
- रक्षा प्रौद्योगिकी: अग्नि और आकाश जैसी स्वदेशी मिसाइलों का विकास किया गया। DRDO ने रक्षा प्रौद्योगिकी को बढ़ाया।
- सूचना प्रौद्योगिकी: भारत का आईटी उद्योग वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रमुख योगदानकर्ता बन गया। देश में 1.25 लाख से अधिक स्टार्टअप और 110 यूनिकॉर्न के साथ तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र है।
- उभरती प्रौद्योगिकियां: भारत 5G, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, ब्लॉकचेन, मशीन लर्निंग जैसी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहा है। राष्ट्रीय सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) ने भारत को उच्च-शक्ति कंप्यूटिंग में अग्रणी बनाया है।
- अंतर्राष्ट्रीय सहयोग: CERN में भारतीय वैज्ञानिकों ने लार्ज हैड्रॉन कोलाइडर और ALICE तथा CMS प्रयोगों में योगदान दिया। 2023 में भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण और उभरती प्रौद्योगिकी पहल शुरू की गई, जिसमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर्स, क्वांटम कंप्यूटिंग शामिल हैं।
- 2015 में एनडीए सरकार द्वारा योजना आयोग की जगह नीति आयोग की स्थापना की गई और पंचवर्षीय योजनाओं को बंद कर दिया गया। नीति आयोग अब विकास योजनाओं के संबंध में सरकार को सलाह देता है।



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