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विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2020 (STIP 2020) भारत की पांचवीं विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति है, जो 2013 की नीति को प्रतिस्थापित करती है। इस ऐतिहासिक नीति को COVID-19 महामारी के दौरान 2020 के मध्य में प्रारंभ किया गया था, जब भारत और विश्व नए वैज्ञानिक दृष्टिकोण की आवश्यकता महसूस कर रहे थे।
मुख्य दृष्टिकोण और उद्देश्य
नीति का प्रमुख दृष्टिकोण आने वाले दशक में भारत को शीर्ष तीन वैज्ञानिक महाशक्तियों के बीच तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर स्थिति प्राप्त करने में सहायक बनाना है। STIP 2020 का मूल उद्देश्य नीचे से ऊपर की ओर(bottom-up) और समावेशी प्रक्रिया अपनाकर नीति निर्माण का विकेंद्रीकरण करना है।
नीति निर्माण की प्रक्रिया
STIP 2020 की निर्माण प्रक्रिया अत्यधिक **समावेशी और भागीदारीपूर्ण** रही है, जो चार परस्पर जुड़े ट्रैक्स पर आधारित थी:
- ट्रैक 1: विस्तारित सार्वजनिक और विशेषज्ञ परामर्श प्रक्रिया
- ट्रैक 2: थीमैटिक समूहों के माध्यम से विशेषज्ञ-संचालित परामर्श (21 विशेषज्ञ समूह)
- ट्रैक 3: मंत्रालयों और राज्यों के साथ परामर्श
- ट्रैक 4: राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर शीर्ष स्तरीय बहु-हितधारक परामर्श
प्रमुख विशेषताएं और प्रावधान
- अनुसंधान और शिक्षा: नीति में शिक्षा अनुसंधान केंद्र (Education Research Centre) और सहयोगी अनुसंधान केंद्र (Collaborative Research Centre) स्थापित करने का प्रस्ताव है। इंडियन साइंस एंड टेक्नोलॉजी आर्चिव ऑफ रिसर्च नामक एक समर्पित पोर्टल सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित अनुसंधान के आउटपुट तक पहुंच प्रदान करेगा।
- लक्ष्य और संकेतक: नीति प्रत्येक 5 वर्षों में पूर्णकालिक समकक्ष (FTE) शोधकर्त्ताओं की संख्या, R&D पर सकल घरेलू व्यय (GERD), और GERD पर निजी क्षेत्र के योगदान को **दोगुना** करने का लक्ष्य रखती है।
- रणनीतिक प्रौद्योगिकी विकास: एक रणनीतिक प्रौद्योगिकी बोर्ड(Strategic Technology Board) की स्थापना का प्रस्ताव है जो सभी सामरिक सरकारी विभागों को जोड़ेगा और खरीदी जाने वाली या स्वदेश निर्मित प्रौद्योगिकियों की निगरानी करेगा। रणनीतिक प्रौद्योगिकी विकास कोष (STDF) निजी क्षेत्र और उच्च शिक्षण संस्थानों को रणनीतिक प्रौद्योगिकियां विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करेगा।[9][1][7]
- उद्यमिता और नवाचार: नीति विज्ञान और प्रौद्योगिकी सक्षम उद्यमिता में प्रणालीगत जोखिमों को कम करने, स्पष्ट और सुलभ नियामक मार्गदर्शन प्रदान करने, और नवाचार के सभी चरणों में वित्तपोषण समर्थन प्रदान करने पर केंद्रित है।
सकारात्मक पहलू
- समावेशी दृष्टिकोण: STIP 2020 की सबसे बड़ी शक्ति इसकी विकेन्द्रीकृत और समावेशी निर्माण प्रक्रिया है, जिसमें विभिन्न हितधारकों - उद्योग, शिक्षा जगत, अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशालाओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं को शामिल किया गया।
- आत्मनिर्भरता पर बल: नीति घरेलू उपकरणों, रेलवे, स्वच्छ तकनीक, रक्षा जैसे चुनिंदा क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर आयात को कम करने हेतु स्थानीय अनुसंधान और विकास क्षमताओं को बढ़ावा देने पर जोर देती है।
- प्रमाण-आधारित नीति: नीति का निर्माण वैज्ञानिक प्रमाणों और डेटा पर आधारित है, जो विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार वेधशाला की स्थापना के माध्यम से सुनिश्चित किया जाएगा।
चुनौतियां और सीमाएं
- वित्तीय संसाधनों का आवंटन: नीति की महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पर्याप्त धन और संसाधनों का आवंटन सबसे बड़ी चुनौती है। STIP को R&D और स्टार्टअप्स के वित्तपोषण में उद्योग और सरकार की भूमिका को स्पष्ट करने की चुनौती का सामना करना पड़ रहा है।
- बुनियादी ढांचे का विकास: वर्तमान वैज्ञानिक अनुसंधान की दिशा के अनुरूप अनुसंधान बुनियादी ढांचे का विकास एक प्रमुख चुनौती है। शैक्षणिक और अकादमिक उपरांत अनुसंधान (PAR) के बीच संसाधनों का असंतुलित आवंटन भारत में प्रौद्योगिकी स्वदेशीकरण प्राप्त करने में बाधा है।
- सहयोग और समन्वय: शिक्षा जगत, उद्योग और सरकार के बीच सहयोग को प्रोत्साहित करना और अनुसंधान को व्यावसायीकरण में परिवर्तित करने के लिए आवश्यक है। हितधारकों के बीच कमजोर अंतर-संबंध एक गंभीर समस्या है।
- मानव संसाधन की कमी: प्रशिक्षित मानव संसाधनों की अनुपलब्धता प्रौद्योगिकी विकास, तैनाती और व्यावसायीकरण के लिए प्रभावी रणनीति की कमी के साथ एक बड़ी बाधा है। युवा पेशेवरों को अपारदर्शी भर्ती प्रक्रिया, बुनियादी ढांचे की कमी, और अनुदान उपयोग जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
- गुणवत्ता और प्रासंगिकता: STIP को हमारे बुनियादी शोध की गहराई, गुणवत्ता और प्रासंगिकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी।
- लैंगिक समानता: महिलाओं का भौगोलिक प्रतिनिधित्व हमेशा संतुलित नहीं है, जबकि सक्रिय भागीदारी में देश के सभी लोगों को शामिल करना चाहिए।[14]
- नियामक और नीतिगत ढांचा : नवाचार को बढ़ावा देने और सार्वजनिक सुरक्षा, उपभोक्ता अधिकारों और नैतिक मुद्दों की रक्षा के बीच संतुलन बनाने वाले नियम और नीतियां बनाना कठिन हो सकता है।
- बौद्धिक संपदा प्रबंधन: विशेष रूप से उभरते उद्योगों में जहां कानून अभी विकसित हो रहे हैं, बौद्धिक संपदा अधिकारों का प्रबंधन और प्रवर्तन चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
- निगरानी और मूल्यांकन: STIP परियोजनाओं की प्रभावशीलता और दक्षता का मूल्यांकन करने के लिए प्रासंगिक मेट्रिक्स, संकेतक, और मूल्यांकन ढांचे विकसित करना आवश्यक है। केंद्र और राज्य सरकारों को वास्तविक समय में STIP के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए मिलकर काम करना चाहिए।
सुझाव और आगे की राह
- नीति की सफलता के लिए R&D गतिविधियों के वित्तपोषण पर ध्यान केंद्रित करना और यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि अनुदान उपयोग की आवश्यकताओं को समय पर पूरा किया जाए। बेहतर अनुसंधान अवसरों की तलाश करने वाले छात्रों के लिए एक ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराया जा सकता है। नीति के लक्ष्यों की समयसीमा को अल्पकालिक और दीर्घकालिक लक्ष्यों में विभाजित किया जा सकता है ताकि नीति कार्यान्वयन प्रक्रिया को सुव्यवस्थित किया जा सके।
- दूरसंचार, अर्धचालक और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को मजबूत किया जाना चाहिए क्योंकि यह अब एक मुख्य उद्योग बन गया है जो देश के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। फोकस उत्पादन की आत्मनिर्भरता पर होना चाहिए और नई प्रौद्योगिकियों के लिए पेटेंट, IPR आदि प्राप्त करने पर भी विचार किया जाना चाहिए।



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