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विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति, 2013
विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति 2013 भारत सरकार द्वारा विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति 2003 को प्रतिस्थापित करने के लिए लाई गई एक महत्वपूर्ण नीति थी। इस नीति में वर्ष 2010 से 2020 के दशक को नवाचार के दशक के रूप में परिभाषित किया गया था।
मुख्य उद्देश्य और दृष्टिकोण
इस नीति के तहत यह स्वीकार किया गया कि विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी बने रहने के लिए भारतीय अर्थव्यवस्था को ज्ञान आधारित अर्थव्यवस्था में परिवर्तन करना आवश्यक है। यह नीति एक मजबूत राष्ट्रीय नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।
प्रमुख लक्ष्य
एसटीआई नीति 2013 की प्रमुख आकांक्षाएं निम्नलिखित थीं:
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समाज के सभी वर्गों में वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देना
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विज्ञान, अनुसंधान और नवाचार में करियर को आकर्षक बनाना
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विज्ञान के कुछ चुनिंदा सीमांत क्षेत्रों में वैश्विक नेतृत्व प्राप्त करने के लिए विश्व स्तरीय अनुसंधान एवं विकास अवसंरचना की स्थापना
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2020 तक भारत को शीर्ष पांच वैश्विक वैज्ञानिक शक्तियों में स्थान देना
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नए तंत्रों के माध्यम से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी आधारित उच्च जोखिम वाले नवाचारों को सुगम बनाना
मुख्य फोकस क्षेत्र
STI नीति 2013 निम्नलिखित क्षेत्रों पर केंद्रित थी:
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भारत और विदेशों में अनुसंधान एवं विकास केंद्रों में निजी क्षेत्र के निवेश को सुगम बनाना
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भारतीय अनुसंधान एवं विकास प्रणाली में बहु-हितधारकों की भागीदारी की अनुमति देना
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सार्वजनिक धन प्राप्त करने के लिए सार्वजनिक संस्थानों के समान निजी क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास का उपचार करना
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विश्व स्तर पर अनुसंधान एवं विकास वित्तपोषण तंत्र और स्वरूप की बेंचमार्किंग
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वेंचर कैपिटल और समावेशन नवाचार कोष प्रणाली को संरेखित करना
बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) और व्यावसायीकरण
नीति में IPR नीति को संशोधित करने का प्रावधान था, जिसमें सार्वजनिक निधियों द्वारा समर्थित होने पर और PPP के तहत उत्पन्न IPR को सह-साझा करने के लिए सामाजिक भलाई के लिए अधिकार प्रदान करने का लक्ष्य रखा गया। प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर (TBIs) और विज्ञान के नेतृत्व वाली उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नए तंत्र की खोज करना भी इसका हिस्सा था।
आगे की प्रगति
इस नीति को बाद में राष्ट्रीय विज्ञान प्रौद्योगिकी और नवाचार नीति-2020 के माध्यम से अद्यतन किया गया, जिसका उद्देश्य भारत को आने वाले दशक में शीर्ष तीन वैज्ञानिक महाशक्तियों के बीच तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर स्थिति प्राप्त करने में सहायक बनाना था।



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