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विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति, 2003
विज्ञान और प्रौद्योगिकी नीति 2003 भारत सरकार द्वारा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के माध्यम से बदले हुए परिदृश्य में कमियों को दूर करने और भारत को एक तकनीकी महाशक्ति बनाने के उद्देश्य से पेश की गई थी।मुख्य उद्देश्य
इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के साथ तालमेल बनाए रखना था, ताकि तेज़ी से भूमंडलीकृत हो रहे विश्व में प्रतिस्पर्द्धी बने रहा जा सके और सतत् विकास के प्राथमिक लक्ष्य को पूरा किया जा सके। एसटीपी-2003 का मूल उद्देश्य नवाचार के लिए अधिक घरेलू क्षमता का निर्माण करना था।
प्रमुख विशेषताएं
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीति 2003 ने अर्थव्यवस्था और समाज को प्रभावित करने वाले क्षेत्रों में अनुसंधान एवं विकास (R&D) और नवाचार निवेश को बढ़ाने के लक्ष्य के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (S&T) क्षेत्रों को एक साथ लाया। इस नीति का उद्देश्य अनुसंधान एवं विकास तथा नवाचार को प्रोत्साहित करना और पारिस्थितिकी तंत्र के भीतर विभिन्न हितधारकों के बीच परस्पर क्रिया को सुगम बनाना था।
मुख्य फोकस क्षेत्र
नीति में निम्नलिखित बिंदुओं पर विशेष जोर दिया गया:
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अनुसंधान और विकास (R&D) में निवेश को बढ़ावा देना
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विज्ञान को सामाजिक-आर्थिक विकास से जोड़ना
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बौद्धिक संपदा अधिकार (IPR) को मजबूत करना
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निजी क्षेत्र (Private Sector) की भागीदारी को प्रोत्साहित करना
ऐतिहासिक संदर्भ
यह नीति भारत की विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी नीतियों की श्रृंखला में तीसरी महत्वपूर्ण नीति थी, जो वैज्ञानिक नीति संकल्प 1958 और प्रौद्योगिकी नीति वक्तव्य 1983 के बाद आई। इस नीति को वर्ष 2013 में विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार नीति द्वारा प्रतिस्थापित किया गया था।



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