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भारतीय अर्थव्यवस्था
मौद्रिक नीति समिति: आरबीआई (Monetary Policy Committee: RBI)
चर्चा में क्यों?
भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जानकारी दी है कि केंद्रीय बैंक का उदार नीति रुख मुद्रास्फीति लक्ष्य 6% की ऊपरी सीमा प्राप्त करने में विफल हो सकता है।
मौद्रिक नीति
- आर्थिक नीति के अंतिम उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए मौद्रिक नीति केंद्रीय बैंक के नियंत्रण में ब्याज दरों, मुद्रा आपूर्ति और ऋण की उपलब्धता जैसे परिमाणों को विनियमित करने के लिए मौद्रिक साधनों के उपयोग को सूचित करती है।
- भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को अधिनियम, 1934 के तहत मौद्रिक नीति के संचालन की जिम्मेवारी निहित है।
- RBI की मौद्रिक नीति का प्राथमिक उद्देश्य विकास को ध्यान में रखते हुए मूल्य स्थिरता बनाए रखना है।
- संशोधित RBI अधिनियम में भारत सरकार द्वारा, रिज़र्व बैंक के साथ परामर्श कर, प्रत्येक पांच वर्ष में एक बार मुद्रास्फीति लक्ष्य (4% + -2%) निर्धारित करने का प्रावधान भी किया गया है।
- 31 मार्च 2021 को केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्ष, अर्थात, 1 अप्रैल 2021 से 31 मार्च 2026 की अवधि के लिए मुद्रास्फीति के लक्ष्य और सहनशीलता सीमा को बरकरार रखा।
- वह ब्याज दर जिस पर रिज़र्व बैंक चलनिधि समायोजन सुविधा (LAF) के तहत सरकार और अन्य अनुमोदित प्रतिभूतियों के संपार्श्विक पर बैंकों को रातों-रात चलनिधि प्रदान करता है।
- वह ब्याज दर जिस पर रिज़र्व बैंक LAF के तहत बैंकों से रातों-रात आधार पर तरलता प्राप्त करता है।
- LAF में रातों-रात और साथ ही सावधि रेपो नीलामियाँ शामिल हैं।
- सावधि रेपो का उद्देश्य इंटरबैंक सावधिक मनी मार्केट के विकास में मदद करना है, जो बदले में ऋण और जमा के मूल्य निर्धारण के लिये बाज़ार आधारित बेंचमार्क निर्धारित कर सकता है तथा इस प्रकार मौद्रिक नीति के हस्तांतरण में सुधार करता है।
- RBI परिवर्तनीय ब्याज दर रिवर्स रेपो नीलामी भी आयोजित करता है, जैसा कि बाज़ार की स्थितियों के तहत आवश्यक है।
- यह एक ऐसी सुविधा है जिसके तहत अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक रिज़र्व बैंक से ओवरनाइट मुद्रा की अतिरिक्त राशि को एक सीमा तक अपने सांविधिक चलनिधि अनुपात (SLR) पोर्टफोलियो में गिरावट कर ब्याज की दंडात्मक दर ले सकते हैं।
- यह बैंकिंग प्रणाली को अप्रत्याशित चलनिधि झटकों के खिलाफ सुरक्षा वाल्व का कार्य करती है।
- MSF दर और रिवर्स रेपो दर भारित औसत कॉल मनी दर में दैनिक संचलन के लिये कॉरिडोर को निर्धारित करते हैं।
- यह वह दर है, जिस पर रिज़र्व बैंक विनिमय बिल या अन्य वाणिज्यिक पत्रों को खरीदने या बदलने के लिये तैयार है। बैंक दर भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 की धारा 49 के तहत प्रकाशित की गई है।
- यह दर MSF दर से जुड़ी हुई है और इसलिये जब MSF दर पॉलिसी रेपो रेट के साथ बदलती है तो स्वचालित रूप से परिवर्तित होती है।
- निवल मांग और समय देयताओं की हिस्सेदारी जो बैंकों को रिज़र्व बैंक में नकदी शेष के रूप में रखनी होती है और इसे रिज़र्व बैंक द्वारा समय-समय पर भारत के राजपत्र में अधिसूचित किया जाता है।
- निवल मांग और समय देताओं की हिस्सेदारी जो बैंकों को अभारित सरकारी प्रतिभूतियों, नकदी एवं स्वर्ण जैसी सुरक्षित व चल आस्तियों में रखना होता है।
- SLR में परिवर्तन अक्सर निजी क्षेत्र के लिये उधार देने की बैंकिंग प्रणाली में संसाधनों की उपलब्धता को प्रभावित करता है।
- इनमें सरकारी प्रतिभूतियों की एकमुश्त खरीद/बिक्री, टिकाऊ चलनिधि डालना/ अवशोषित करना क्रमशः दोनों शामिल हैं।
- मौद्रिक प्रबंधन के लिये इस लिखत को वर्ष 2004 में आरंभ किया गया।
- बड़े पूंजी प्रवाह से उत्पन्न अधिक स्थायी प्रकृति की अधिशेष चलनिधि को अल्पकालिक सरकारी प्रतिभूतियों और राजस्व बिलों की बिक्री के ज़रिये अवशोषित किया जाता है।
- जुटाए जाने वाली नकदी को रिज़र्व बैंक के पास एक अलग सरकारी खाते में रखा जाता है।
- संशोधित भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम स्पष्ट रूप से रिज़र्व बैंक के लिए देश के मौद्रिक नीति ढांचे को परिचालित करने के लिए विधायी अधिदेश का प्रावधान करता है।
- इस ढांचे का लक्ष्य वर्तमान और उभरती समष्टि-आर्थिक स्थिति और मुद्रा बाजार दरों को रेपो दर के आसपास संचालित करने के लिए चलनिधि स्थिति के उतार-चढ़ाव के आकलन के आधार पर नीति (रेपो) दर निर्धारित करना है। मुद्रा बाजार के माध्य्म से रेपो दर बदलाव पूरी वित्तीय प्रणाली में अंतरित होते हैं जो आगे मुद्रास्फीति और वृद्धि के मुख्य निर्धारक तत्व समग्र मांग को प्रभावित करते हैं।
- रेपो रेट की घोषणा के बाद, रिज़र्व बैंक द्वारा तैयार किए गए परिचालन ढांचे में उचित कार्रवाई के माध्यम से दैनिक आधार पर चलनिधि प्रबंधन की परिकल्पना की गई है, इस कार्रवाई का लक्ष्य परिचालन लक्ष्य-भारित औसत कॉल दर (डब्ल्यूएसीआर) को रेपो दर के आसपास संचालित करना है।
- परिचालन ढांचे को मौद्रिक नीति रुख की अनुरूपता को सुनिश्चित करते हुए उभरती वित्तीय बाजार और मौद्रिक स्थिति के आधार पर सही और संशोधित किया गया है। चलनिधि प्रबंधन ढांचे को पिछली बार अप्रैल 2016 में उल्लेखनीय रूप से संशोधित किया गया था।
- संशोधित (2016 में) आरबीआई अधिनियम, 1934 की धारा 45ZB के तहत केंद्र सरकार को छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) का गठन करने का अधिकार है।
- धारा 45ZB में कहा गया है कि "मौद्रिक नीति समिति मुद्रास्फीति लक्ष्य को प्राप्त करने के लिये आवश्यक नीति दर निर्धारित करेगी"।
- मौद्रिक नीति समिति का निर्णय बैंको के लिये बाध्यकारी होगा।
- धारा 45ZB के अनुसार एमपीसी में 6 सदस्य होंगे:
- RBI गवर्नर इसके पदेन अध्यक्ष के रूप में।
- मौद्रिक नीति का प्रभारी डिप्टी गवर्नर।
- केंद्रीय बोर्ड द्वारा नामित बैंक का एक अधिकारी।
- केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त तीन व्यक्ति।
- इस प्रक्रिया के तहत "अर्थशास्त्र या बैंकिंग या वित्त या मौद्रिक नीति के क्षेत्र में ज्ञान और अनुभव रखने वाले सक्षम व निष्पक्ष व्यक्तियों" की नियुक्ति की जाएगी।
- एमपीसी से वर्ष में कम से कम चार बैठक करना अपेक्षित है।
- एमपीसी की बैठक के लिए कोरम चार सदस्यों का है।
- एमपीसी के प्रत्येक सदस्य का एक वोट है तथा वोटों के समान रहने की स्थिति में गवर्नर के पास दूसरा या कास्टिंग वोट है।
- भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के अध्याय III एफ के प्रावधानों के अनुसार एमपीसी की प्रत्येक बैठक के समाप्त होने के बाद एमपीसी द्वारा अपनाया गया संकल्प प्रकाशित किया जाता है।
- 14वें दिन एमपीसी की कार्यवाहियों पर कार्यवृत्त प्रकाशित किया जाता है जिसमें निम्नलिखित शामिल होता है
- क एमपीसी द्वारा अपनाया गया संकल्प
- ख. संकल्प पर प्रत्येक सदस्य का कारणसहित वोट तथा
- ग. अपनाए गए संकल्प पर प्रत्येक सदस्य का वक्तव्य
- प्रत्येक छह महीने में एक बार, रिज़र्व बैंक से मौद्रिक नीति रिपोर्ट नामक दस्तावेज प्रकाशित करना अपेक्षित है जिसमें निम्नलिखित को स्पष्ट किया जाता है :
- क. मुद्रास्फीति के स्रोत
- ख. 6-18 महीने आगे की मुद्रास्फीति का पूर्वानुमान।



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